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केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर एक प्राचीन मंदिर है जिसका इतिहास ईसा से भी 500 वर्ष पूर्व का है। इस मंदिर को भारत में भगवान विष्णु से जुड़े 108 पवित्र मंदिरों में से एक माना जाता है। मंदिर की सबसे दिलचस्प बात इसके तिजोरियों में बंद खजाने है जो इस मंदिर को दुनिया के सबसे अमीर मंदिरों में से एक बनाते है। कहा जाता है कि पद्मनाभस्वामी मंदिर के तिजोरियों में इतना खजाना है जिससे दुनिया के अनेक समस्याओं का समाधान हो सकता है किंतु खजाने पर एक प्राचीन अभिशाप अंकित है। ये मंदिर बहुत पहले से ही छिपे हुए खजाने से संबंधित कहानियों से चर्चा में रहा है और केरल के अन्य मंदिरों के विपरीत इस मंदिर के प्रबंधन एवं प्रशासन का काम त्रावणकोर के पूर्ववर्ती शाही परिवार करते हैं।

शाही परिवार ही संभालते हैं मंदिर के प्रबंधन का काम 

स्वतंत्रता के बाद से ही मंदिर को सन् 1991 तक शाही परिवार द्वारा चलाए जा रहे एक ट्रस्ट से नियंत्रित किया जाता था,जब त्रावणकोर के अंतिम शासक चिथिरा थिरुनल बलराम वर्मा का निधन नहीं हो गया। 1991 में अंतिम त्रावणकोर शासक की मृत्यु के बाद भी राज्य सरकार ने मंदिर के प्रबंधन को उनके छोटे भाई उत्रेदम थिरुनल मार्तंड वर्मा द्वारा संभालने और बनाए रखने की अनुमति दी। लेकिन 2011 में केरल उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि परिवार अपने प्रशासनिक अधिकारों को जारी नहीं रख सकता। हालाँकि हाई कोर्ट के फैसले को बाद में सुप्रीम कोर्ट ने बदलकर शाही परिवार को ही मंदिर के प्रबंधन की जिम्मदारी सौंपी। साथ ही मंदिर के प्रशासनिक काम की देखरेख के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पांच सदस्यीय प्रशासनिक समिति का भी गठन किया जिसमें तिरुवनंतपुरम जिला न्यायाधीश की अध्यक्षता के साथ केरल और केंद्र सरकारों के दो नामित अधिकारी,मंदिर के मुख्य पुजारी और शाही परिवार से एक उम्मीदवार हैं।

1 लाख करोड़ से भी अधिक है मंदिर की संपत्ति

सुप्रीम कोर्ट ने तब के Comptroller Auditor General, विनोद राय को मंदिर के संपत्तियों तथा खताओं को ऑडिट करने की जिम्मेदारी दी। जुलाई 2011 में ही मंदिर में छिपे खजाने के बारे में सार्वजनिक रूप से पता चला जब विनोद राय द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के अनुसार पद्मनाभस्वामी मंदिर के खजाने में लगभग 1 लाख करोड़ रूपये से भी अधिक की संपत्ति बताई। हालांकि खजाना ज़मीन के 5 फीट नीचे छिपा हुआ भी बताया गया। खजाने की खोज ने व्यापक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया क्योंकि इसे दुनिया के इतिहास में सोने और कीमती पत्थरों की वस्तुओं का अब तक का सबसे बड़ा संग्रह माना जाता है। पद्मनाभस्वामी मंदिर के खजाने में सोने के सिंहासन, मुकुट, सिक्के, मूर्तियाँ, आभूषण और हीरे तथा अन्य बहुमूल्य पत्थर शामिल हैं। मंदिर में छह भूमिगत वॉल्ट हैं,जिसे मंदिर के पुजारियों के सहायता से A से F तक लेबल किया गया है। हालांकि ये कहा जाता है कि वॉल्ट B आज तक नहीं खोला गया, परन्तु विनोद राय ने अपने रिपोर्ट में बताया कि मंदिर के रिकॉर्ड के अनुसार सन् 1990 में वॉल्ट B दो बार और फिर सन् 2002 में पांच बार खोला गया था।

क्या है वॉल्ट B के पीछे का रहस्य ?

वॉल्ट B के खजाने की सुरक्षा को लेकर कई  कहानियां प्रचलित है। वॉल्ट B के दरवाजे पर नाग और यक्ष की नक्काशी अंकित है जिसे वॉल्ट से बाहर रहने की चेतावनी के रूप में देखा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि राजा मार्तण्ड वर्मा ने सर्वोच्च धार्मिक साधुओं के मंत्रों के जाप के बाद मंदिर के खजाने की रक्षा के लिए वॉल्ट B को सील कर दिया गया था। अब पुनः वॉल्ट B का दरवाजा केवल उच्च स्तर के साधुओं द्वारा हीं खोला जा सकता है जो दिव्य गरुड़ मंत्र के जाप के ज्ञान से परिचित हो। वॉल्ट B का दरवाजा किसी और तरीके से नहीं खोला जा सकता है और वर्तमान में दुनिया में कोई भी ऐसा सिद्धपुरुष नहीं है जिसके पास अत्यधिक पवित्र गरुड़ मंत्र के जाप का पूर्ण ज्ञान हो। हालाँकि कहा ये भी जाता है कि वॉल्ट B के अंदर एक आंतरिक कक्ष है जो सोने की मोटी दीवारों से बना है। त्रावणकोर का शाही परिवार के साथ केरल के लोग भी मानते ​​है कि इससे श्री पद्मनाभस्वामी नाराज़ हो सकते है और देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर एक भयानक अभिशाप लग सकता है।

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर निश्चित रूप देश के इतिहास में एक अविश्वसनीय घटना की तरह रहा  है। मंदिर में केवल हिंदुओं को प्रवेश की अनुमति है और हर साल देश विदेश से लाखों पर्यटक मंदिर के दर्शन करने आते हैं।  साथ ही साथ मंदिर परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम हैं और सुरक्षा कैमरे के अलावा 200 से भी अधिक सुरक्षाबल मंदिर की सुरक्षा में दिन रात तैनात रहते है।